त्रय उपस्तम्भा इति।आहारः स्वप्नो ब्रह्मचर्यमिति।
इस सूत्र में स्वस्थ जीवन के तीन आधार(स्तम्भ) बताया है। आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य। त्रय का अर्थ तीन, उप का अर्थ सहायक
और स्तम्भ का अर्थ होता है खम्भा। जिस प्रकार मकान का आधार खम्भे होते हैं उसी प्रकार
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य आधार हैं। मकान में दो प्रकार के खम्भे होते हैं प्रधान तथा
अप्रधान। यहां शरीर आत्मा के लिए मकान है और इस मकान का प्रधान स्तम्भ है वात, पित्त, कफ। इन तीनों (वात, पित्त, कफ) के संतुलन का आधार आहार, निद्रा तथा ब्रह्मचर्य रूपी ये तीन
स्तम्भ ही हैं।
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