करो प्रयोग रहो निरोग
बुधवार, 5 दिसंबर 2018
शनिवार, 24 नवंबर 2018
हमारा आहार कैसा हो ? भाग १ (what should be in our diet? Part 1)
हमारा आहार कैसा हो ? भाग १ (what should be in our diet? Part 1)
आहार हमारे जीवन का आधार ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण प्राणी जगत् के जीवन (प्राणों) का आधार है। लेकिन आहार या जीवन पर विचार करते हुये, जीवन जीने का अवसर केवल एक प्राणी को प्राप्त है जिसका नाम है मनुष्य। मनुष्य में तीन प्रकार की वृत्तियां होती हैं- सात्त्विक, राजसिक और तामसिक। इन तीनों प्रकार के वृत्तियों का आधार आहार ही है। आहार के विषय में लोक प्रसिद्ध कहावत है- ‘जैसा खायें अन्न वैसा बने मन’।
रविवार, 18 नवंबर 2018
18 नवम्बर प्राकृतिक चिकित्सा दिवस
18 नवम्बर प्राकृतिक चिकित्सा दिवस
स्वास्थ रक्षा में प्राकृतिक चिकित्सा की सफलता तथा उपयोगिता को देखते हुए केन्द्रीय आयुष मंत्रालय ने 17-11-2018 को फैसला कि 18 नवम्बर को योग दिवस की ही प्राकृतिक चिकित्सा दिवस भी मनाया जायेगा। इसका उद्देश्य है प्राकृतिक चिकित्सा के सुरक्षित उपयोग के लिए जागरुकता फैलाना। इसके लिए आयुष मंत्रालय के अन्तर्गत कार्यरत केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद को स्वास्थ शिविर, कार्यशाला, प्रदर्शिनी आदि आयोजित करने का दायित्व दिया गया।
शनिवार, 17 नवंबर 2018
हमारे जीवन में सूर्य जैसा सेवा भाब होना चाहिए
हमारे जीवन में सूर्य जैसा सेवा भाब होना चाहिए

संसार के हर वस्तु में ज्ञान छिपा है। हमें अपने ज्ञान चक्षुओं से देखने व विचारने की आवश्यकता है। जिस प्रकार दूध में घी छीपा रहता है, लकड़ी में अग्नि छीपी रहती है,
फूलों में सुगंध, शहद में मिठास छीपी होती है। ईश्वर ने जगत कल्याण के इतनी सुन्दर सृष्टि
की रचना की है उसमें भी सर्वश्रेष्ठ रचना मानव है। इस मानव को पंच ज्ञानेन्द्रियों
से सुशोभित किया कि वो अपने ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग करके अपने लिए उपयोगी, कल्याणकारी
सामग्री को ग्रहण कर सकें तथा परोपकारी जीवन जी सके यानि अपने साथ-साथ अन्य प्राणियों
का भला कर सके।गुरुवार, 1 नवंबर 2018
लालाच का फल (Fruit of greed).........
लालाच का फल (Fruit of greed) -
एक व्यक्ति
छाता बनाने तथा छाता मरम्मत करने का काम बड़े ही आनन्द, ईमानदारी व लगन
के साथ करता था। साथ ही साथ ईश्वर के नाम का जाप करता रहता था तथा अपने ग्राहकों को भी आध्यात्मिक बातें बताया करता था। ग्राहक उससे बहुत ही प्रसन्न रहते थे और उसे पसंद करते थे। उसे अपने कार्य से जीवन जीने के लिए पर्याप्त धन प्राप्त हो जाते थे।
शनिवार, 20 अक्टूबर 2018
स्वस्थ कैसे रहें(How To Be Healthy)?
स्वस्थ कैसे रहें(How To Be Healthy)?
स्वस्थ जीवन की कामना हर व्यक्ति की होती है। प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि मुझे कोई रोग न हो लेकिन वह बच नहीं पाता है। शरीर अस्वस्थ होने के दो ही कारण ज्ञात होते हैं 1. स्वास्थ्य के लिए उपयोगी ज्ञान का अभाव या 2. उस ज्ञान की अवहेलना कर मनमानी करना। जो हमारे स्वास्थ्य लिए हितकारी है। स्वस्थ कैसे रहें इससे पहले हमें इस बात पर विचार करना होगा कि स्वास्थ्य क्या है? स्वास्थ्य की परिभाषा क्या है? स्वास्थ्य को समझने के लिए आचार्य सुश्रुत ने बहुत ही अच्छा सूत्र दिया हैं- समाग्निश्च समधातुमलक्रिय:। प्रसन्नात्मेन्द्रियमना: स्वस्थ इत्यभिधीयते॥ इस सूत्र के माध्यम से आचार्य ने बहुत ही सरलता से स्वास्थ्य को परिभाषित किया है कि कैसे जानें हम स्वस्थ हैं।
इसे समझने के लिए यहां जायें- https://swasthkaserahen.blogspot.com/2018/09/healths-recognition-we-are-healthy-or.html
स्वस्थ कैसे रहें? स्वस्थ रहने के लिए आचार्य चरक का सूत्र है-
त्रय उपस्तम्भा इति।आहारः स्वप्नो ब्रह्मचर्यमिति।
इस सूत्र में स्वस्थ जीवन के तीन आधार(स्तम्भ) बताया है। आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य। त्रय का अर्थ तीन, उप का अर्थ सहायक
और स्तम्भ का अर्थ होता है खम्भा। जिस प्रकार मकान का आधार खम्भे होते हैं उसी प्रकार
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य आधार हैं। मकान में दो प्रकार के खम्भे होते हैं प्रधान तथा
अप्रधान। यहां शरीर आत्मा के लिए मकान है और इस मकान का प्रधान स्तम्भ है वात, पित्त, कफ। इन तीनों (वात, पित्त, कफ) के संतुलन का आधार आहार, निद्रा तथा ब्रह्मचर्य रूपी ये तीन
स्तम्भ ही हैं।
इस सूत्र में स्वस्थ जीवन के तीन आधार(स्तम्भ) बताया है। आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य। त्रय का अर्थ तीन, उप का अर्थ सहायक और स्तम्भ का अर्थ होता है खम्भा। जिस प्रकार मकान का आधार खम्भे होते हैं उसी प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य आधार हैं। मकान में दो प्रकार के खम्भे होते हैं प्रधान तथा अप्रधान। यहां शरीर आत्मा के लिए मकान है और इस मकान का प्रधान स्तम्भ है वात, पित्त, कफ। इन तीनों (वात, पित्त, कफ) के संतुलन का आधार आहार, निद्रा तथा ब्रह्मचर्य रूपी ये तीन स्तम्भ ही हैं।
शनिवार, 6 अक्टूबर 2018
भारत में पश्चिमी कुकर्म का अधिकारिक आगमन
भारत में पश्चिमी कुकर्म का अधिकारिक आगमन
भारत में पश्चिमी देशों का दो कचरा और आया। व्यभिचार फैलाने वाला एक नया कानून एक व्यभिचारी द्वारा 6/9/2018 को पास हुआ समलैंगिकता का। दूसरा पति-पत्नी किसी का किसी पर अधिकार नहीं है वो शादी के बाद भी किसी के साथ हमबिस्तर हो सकते हैं। फिर बच्चों का नाम किसका मिलेगा, पालन-पोषण की जिम्मेदारी किसकी होगी नालायक बाप का नायक औलाद(जज)। और वेश्यावृत्ति वालों व गृहस्थ-जीवन में अन्तर क्या होगा। मान-सम्मान का क्या अर्थ होगा। दोपायों-चौपायों में कैसे अंतर स्पष्ट होगा। वेद कहता है 'मनुर्भव' यह किसके लिए कहा जा रहा है नालायक। मानव के त्री ऐष्णाओं में पुत्रेष्णा (सन्तान) अपने जैसा जीव उत्पन्न करना, क्या ये समलैंगिकता से पूरी होगी।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

